iodium 30 uses in hindi iodum

Iodum | आयोडम | Iodium uses in hindi

Iodum/Iodium
आयोडम

आयोडीन

1 भाग आयोडीन और 99 भाग अल्कोहल मिलाकर 2x  पोटेंसी तैयार की जाती है।

इसका रोगी अत्यंत दुबला पतला और साँवले रंग, काले केश, काले आँख होते हैँ।

प्रमुख लक्षण – 

खाना खूब खाना और भूख भी खूब लगना फिर भी शरीर सूखते जाना इसका प्रमुख लक्षण है। मेटाबोलिज्म तेज होता, ग्लैण्ड या अन्य ग्रंथियों का सूखते जाना, भूख के साथ अधिक प्यास लगना, अत्यधिक दुर्बलता, थोड़ी सी मेहनत से ही पसीना आने लगता है। स्तन और अंडकोष सूखते जाना।

टीबी के रोगी की तरह रोगी दुर्बल और कमजोर। इतना अधिक कमजोरी की बोलने से भी पसीना आ जाता है, और सिर में चक्कर आने लगता है। सीढ़ी के ऊपर चढ़ते समय कमजोरी से हाफने लगता है। जो पहले काफी अच्छे थे बाद में किसी कारण से कमजोर हो गए हो उनको सूखा खाँसी, गला और छाती घड़ घड़ करती है।

सुखंडी रोग में खूब खाना लेकिन खाना पचाने में असमर्थ, अधकचरा जैसा पाखाना होना। थायरॉइड ग्लैंड, स्तन, मूत्राशय ग्लैंड, अंडकोष ये सब का बढ़ जाना और थुलथुलापन। सुबह से लेकर रात तक इस प्रकार डकार आना जैसे सब खाया पिया खाली हो गया हो। बच्चों के छाती और गले के बीच दर्द, गले में साय सांय आवाज गले की नली पर हाथ रखता है, चेहरा सफेद जो जाता है, आवाज बैठ जाता है।

खाँसी – बच्चों की काली खाँसी में अगर स्पांजिया, हिपर ये सब से फायदा ना हो। कुत्ते की आवाज के तरह खाँसी होना। बिल्कुल सूखी खाँसी, साँस लेने में तकलीफ और खिंचाव होना, गले में परदा सा जम जाना। श्वासनली में अकड़न, गले की आवाज कभी कभी बिल्कुल बंद हो जाना। बच्चा अगर सांवला, बिल्कुल काले केश वाला और काला आँख वाला हो तो आयोडम और अगर बच्चा गोरा हो तो ब्रोमियम देना चाहिए।

हूपिंग खाँसी – घर में किसी एक को हूपिंग खाँसी होने पर उसके साथ खेलने या रहने वाले अन्य बच्चों को भी हो जाए। ऐसा लगे की साँस अचानक रुक जाएगी गला बंद हो जाने से। (ब्रोमियम और ड्रोसेरा)

ह्रदय – ह्रदय कसकर दबाया हुआ अनुभव होता है, धड़कन ज्यादा रहना और जरा सा मेहनत से धड़कन बढ़ जाना, बीच बीच में ऐसा लगना जैसे कोई कलेजा दबाये हुए है। बोल नहीं सकना।

कान – कान के नली में पुराना पीब, गांठे, कान में गर्जन जैसी आवाज होना ये सब के बाद बहरापन।

गांठ फूलना – कान का जड़, स्तन, अंडकोष इत्यादि हर ग्रंथि का फूल जाना और ट्यूमर। डिंबकोष का ट्यूमर।गांठे बहुत बड़ा और कड़ी हो जाती है मगर उसमें दर्द बिल्कुल नहीं होता है, ग्रंथि के सूजन में अगर दर्द बिल्कुल ना रहे तो यह दवा देना चाहिए।

मुँह – मुँह से लार निकलना, गर्भावस्था में मुँह से लार निकलना। लिवर, प्लीहा आदि के कोई बीमारी होने के कारण मुँह से लार बहना।

टॉन्सिल – टॉन्सिल के सूजन में नयी बीमारी में आयोडम और बीमारी पुरानी हो जाने पर बैराइटा आयोड, मर्क आयोड देना चाहिए।

रोग बढ़ना – मेहनत करने से, छूने से,  गरम नम हवा से गरमी से।

रोग कमी – भोजन के समय, भोजन के बाद, ठंडी हवा से।

तुलना करें – ब्रोमियम, स्पोंजिया, हीपर, मर्क, एब्रोटेनम, एकोनाइट
क्रियानाशक – ऐन्टिम टार्ट, एपिस, आर्सेनिक, एकोनाइट, चायना, सल्फर, थूजा, कैम्फर, बेलाडोना
मात्रा – 3x, 30, 200 

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