dulcamara 200 uses in hindi

Dulcamara | डल्कामारा

Dulcamara
डल्कामारा

एक तरह के पौधे से बनाया जाता है

सर्दी लगकर बीमारी हो जाना या सर्दी पड़ने पर बीमारी बढ़ जाना। जब गरमी का मौसम खतम होने वाला हो उस वक्त जब दिन गरम और रात ठंडा होता है उस समय यह विशेष रूप से फायदेमंद है। नम मौसम के दुष्प्रभाव या भीगने के बाद सर्दी जुकाम और पतले दस्त जैसी बीमारी का लक्षणों में। जिनको चलने या हिलने डुलने की शक्ति नहीं रहती जो हर समय बेचैन रहते हैँ और उत्तेजित रहते हैँ, जो सर्दी सहन नहीं कर सकते।

मुँह, ललाट, सिर और दोनों कनपटियों में उद्भेद और उसपर भूरे पीले रंग की पपड़ी जमना, खुजलाने पर खून निकलना।

नम जगह में काम करनेवाले को कोई बीमारी हो जाना। सारे शरीर में दर्द और खुजली होना और उसके बाद जलन होना, खुजली गरमी से बढ़ता है और सर्दी या ठंड से घट जाता है। गर्दन और कमर में दर्दनाक सुन्नपन और लकवा का लक्षण। सर्दी या बरसात में एक्जिमा शुरू होना और गरमी में गायब में हो जाना। पुराना आमवात जो सर्दी आते ही शुरू हो जाता है और पुरे जाड़ा तक रहता है।

रोग का कारण – नमी, ठंडक से, पानी के अंदर होकर चलने से, नहाने धोने से चोट से, पसीना रुकने से, कोई चर्म रोग रुक जाने के बाद।

रोग बढ़ना – ठंडी हवा से, नम और बरसात के मौसम से, रात में, पानी में भीगने से आराम करने से।

कमी – घूमने फिरने से, बाहरी गरमाई से।

नाक – सूखा जुकाम, नाक बंद, ठंड के मौसम या बारिश होने पर नाक का बंद हो जाना। गाढ़ा पीला श्लेष्मा, खून का पपड़ी । जरा सा ठंड लगने से नाक बंद हो जाती है। शिशुओं का जुकाम हो जाना।

कान – दर्द होना, भनभनाहट, सुई गड़ने के जैसा दर्द और कान के अंदर जड़ (parotids) में सूजन।
लकवा या पक्षाघात – शुरू में बर्फ जैसा ठंड का अनुभव होना और फिर धीरे धीरे मामूली दर्द शुरू होकर दर्द का लक्षण हो और फिर लकवा हो जाना ।

सर्दी लगकर लकवा होने में डल्कामारा, रस टॉक्स और कॉस्टिकम तीनों फायदेमंद है। डल्कामारा- रोग की पहली अवस्था में, रस टॉक्स – बीमारी कुछ पुराना हो जाने पर कॉस्टिकम – जब बीमारी ज्यादा पुराना हो जाए।

गला – टॉन्सिल का सूजन, गले में घाव, जीभ और मसूढ़ों में सुन्नपन और लंगड़ापन, जीभ का लकवा इत्यादि (बैराइटा कार्ब)। अचानक सर्दी लगकर, पानी में भीग कर या गरमी के बाद अचानक सर्दी लगने से खाँसी और जुकाम हो जाना।

पीठ – पीठ के निचले भाग में दर्द, गर्दन अकड़ जाना, दर्द जैसे काफी समय तक झुके रहने से होता है। ठंड लगने के कारण कंधे और गर्दन में दर्द और लंगड़ापन/सुन्नपन।

पेट – गरमी के दिन में जब अचानक मौसम ठंडा हो जाता है उस टाइम पतले दस्त और पेचिस, हरे रंग का पनीला, खूनी मल होना

त्वचा – खुजली, हमेशा ठण्डे और नम मौसम में बढ़ जाते हैँ। हर्पीज जोस्टर। त्वचा पर फफोले निकलना जो लुप्त होकर काले लाल धब्बे छोड़ जाते हैँ। सर्दी के कारण ग्रंथियां फूल जाती है और कड़े हो जाती है। छोटे छोटे फोड़े निकलना, लाल धब्बे, पित्ती जो खासकर ठंड से होती है। चेहरे, जननांग, हाथों पर फोड़े फुंसिया आदि का निकलना। चेहरा और हाथ की बड़े बड़े चिकने मस्से।

स्त्री – ऋतू शुरू होने के पहले त्वचा पर घमौरी के जैसे दाने निकलना, चकत्ते निकलना।

पूरक – बैराइटा कार्ब से पहले और बाद में डल्कामारा काफी फायदा करती है।

क्रियानाशक –  कैम्फर, क्यूप्रम, मर्क, इपिकाक।
प्रतिकूल – बेलाडोना, लैकेसिस।
तुलना करें – रस टॉक्स, सिमिसिफ्यूगा, नेट्रम सल्फ, ब्रायोनिया
मात्रा – 3, 30, 200 

 

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