bawaseer ka ilaj

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अर्श या बवासीर

Piles or haemorrhoids 

Fissure in ano

 

बवासीर की बीमारी में मलद्वार के भीतरी और बाहर कही भी मस्से छोटे–छोटे आकार के हो जाते हैं और इसमें खून जमा होता है, मलद्वार के भीतर या बाहर सूजन और बकरी की छीमी जैसा एक तरह का मस्सा (टयूमर) पैदा हो जाने को अर्श या पाईल्स (piles) कहते हैं। शिरा का वेरीकोज अर्थात प्रसारण होकर यह बीमारी होती है। बबासीर एक दीर्घकालीन और प्राणघातक बीमारी है, यह शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है। लेकिन अर्श या बवासीर शब्द से गुदा द्वार या मल द्वार के ही अर्श बोध होता है। यह आंत के अंतिम भाग का सर्वाधिक कष्टदायक रोग है। बबासीर म प्रायः चमकीला लाल खून का स्राव होते देखा गया है। जहाँ Venous congestion होता है वह काला खून होता है।

इस रोग में गुदाद्वार की नसें फुल जाती है जिससे छोटे छोटे टयूमर या मटर या अंगूर या इससे भी बड़े आकार के मंसाकुर हो जाते हैं जो बहुत ही कष्ट देते हैं।

 

बवासीर के प्रकार

पाइल्स या अर्श मुख्यतः 3 प्रकार के होते हैं

  1. एक्सटर्नल या ब्लाइंड पाइल्स (External or Blind Piles) – बाहरी मस्से इसे बादी बवासीर भी कहते हैं |
  2. इन्टरनल या ब्लीडिंग पाइल्स (Internal or Bleeding piles) – रक्तस्रावी या भीतरी मस्से इसे खुनी बवासीर भी  कहते हैं |
  3. मिक्स्ड पाइल्स (Mixed Piles)

लक्षण (Piles symptoms)

 

• External या बाहरी मस्से (बादी)–

मलद्वार खुजलाता है, सुरसुरी होती है, कभी कभी प्रदाह और दर्द होता है, सुजन हो जाती है और जलन होती है। इस समय रोगी को चलने फिरने में भी काफी तकलीफ होती है, पखाने के समय बड़ी तकलीफ होती है। कभी कभी यह कष्ट घट जाता है लेकिन फिर यही हालत दुबारा हो जाती है। इसमें खून नही गिरता है और यह न तो पकता है और न ही घाव ही होता है।

• Internal Piles या भीतरी मस्से (खूनी)

खून गिरता है, खून की पिचकारी सी चलती है, शुरुआती अवस्था में बहुत दर्द होता है, पाखाना करते समय मस्से बाहर निकाल आते हैं तब बहुत तकलीफ होती है। लगातार ज्यादा दिन तक खुन गिरते रहने से रक्तहीन हो जाता है और एनीमिया होने का डर रहता है। इसमें बीच बीच में रक्तस्राव होता है। कभी कभी खून गिरना बंद हो जाता है फिर अचानक खून निकलने का शिकायत हो जाता है। रोग पुराना हो जाने पर दर्द नही रहता और सिर्फ रक्तस्राव (Bleeding) होता है। बबासीर के मस्से शुरू शुरू में कुछ दिनों तक पाखाने के वक्त बाहर निकल आते हैं और भीतर घुस जाते हैं, या रोगी अंगुली से दबाकर भीतर कर देता है, लेकिन कुछ दिन बाद बिना पाखाना जाने के भी अन्य समय भी बाहर निकले रहता हैं और हर वक्त खून निकलता रहता है।

कभी कभी एक ही अवस्था में काफी देर तक बैठे रहने से bleeding का पता नहीं चल पाता और कपड़े गंदे हो जाते हैं खून के कारण |

Note – बबासीर का रक्तस्राव प्रायः मल त्याग के पहले या बाद में होता है मल के साथ नहीं। मलद्वार में कोई चीज अटकी हुई है ऐसा मह्सुस होता है, बबासीर का खून कभी कभी बूंद- बूंद अलग गिरता है और कभी कठिन मॉल के एक बगल एक रेखा सी बनकर निकलता है। खून गिरने में यह ध्यान रखना चाहिए की कभी कभी आमाशय के bleeding के कारण भ्रम हो सकता है।

 

कारण

Piles Causes

  • पुरानी कब्जियत, बबासीर मुख्यतः कब्ज का ही बिगड़ा हुआ परिणाम है इसके अलावा भी और कई कारण हो सकते हैं।

  • लिवर की गड़बड़ी जैसे Liver के भीतर और Liver धमनी आदि में खून जमा( Congestion) होना

  • Sirrhosis of Liver

  • सौच के समय अत्यधिक जोर लगाना या अधिक काँखना

  • मांस, अंडा, प्याज लहसुन या तीखा और मसालेदार खाना अधिक खाना, गरममसाले से बनी कोई खाना ज्यादा खाते रहना

  • खाना जरूरत से अधिक खाना

  • रात को देर तक जागना

  • वंशानुगत कारण (पहले किसी पूर्वज या किसी नजदीकी रिश्तेदार को अगर रोग रहा हो )

  • ज्यादा चटपटी और गरिष्ट तथा मिर्च मसाले वाली चीजे खाने की आदत

  • शारीरिक परिश्रम की कमी

 Piles ka gharelu upchar

घरेलु उपचार

  • सुबह खली पेट पपीता खाना चाहिए मूली के छोटे छोटे टुकड़ों को देशी घी में तलकर रोज खाएं, यह खुनी और बादी दोनों तरह के बबासीर की कारगर दवा है।
  • गाजर का रस 2 कप और पलक का रस 1 कप, दोनों को रोज मिलाकर सेवन करना चाहिए
  • करेले को कुचलकर उसका रस निकालकर 2 चम्मच रस में थोड़ा स चीनी मिलाकर पी जाएँ, ऐसा 30 दिन तक करें
  • नीम का तेल दिन में 3-4 बार मस्सों पर लगाना चाहिए
  • तुलसी के पट्टो का रस निकलकर नीम के तेल के साथ मस्सों पर लगाएं
  • कलि मिर्च 20 ग्राम, जीरा 20 ग्राम, मिश्री 20 ग्राम। तीनों को कूटकर पीसकर कपड़े से छानकर एक – एक चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करें।
  • छोटो हरड का चूर्ण अध चम्मच रोज लेने से बादी बबासीर ख़त्म हो जाएगी |

 

इस रोग के इलाज के लिए पेट का साफ़ होना बहुत जरूरी है क्युकी कब्ज होने से अर्श शिरा (Haemorrhoidal Vein) पर रक्त संचय अधिक होता है |

 

Homeopathic Medicine for Piles in hindi

सल्फर 1M की 1 खुराक 10 दिन पर एक बार और नक्स वोमिका 30 दिन में 3 बार रोज – साधारण खुनी या बादी बबासीर की मुख्य दवा |

कैलकेरिया फ्लोर 6x  या 12x 4-4 गोली दिन में 4 बार – बवासीर की एक उत्तम दवा है, मलद्वार में खुजली और विदर ( Fissure in Anus ),रक्तस्राव (Bleeding), खूनी तथा बादी बवासीर ( internal and External piles) साथ ही अक्सर कमर में दर्द रहता हो और कब्जियत की शिकायत। 

एस्कुलस हिप  30 या 200 दिन में 3 बार – बादी बबासीर जिसमें जलन और पीड़ा होती है, बबासीर के साथ पाचन, पित्त आदि रोगों से पीड़ित, रोगी के मलद्वार में बहुत सी काटियाँ या कांच के टुकड़े भरे हुए मालूम होते हैं और वे चुभते हैं, साथ ही कब्ज और मलद्वार सुखा, मलद्वार के शिराएँ रक्त संचय से फूली हुई। मस्सा बैगनी रंग का रहता हो। साथ में कमर में भी दर्द रहता है। अगर नक्स और सल्फर द्वारा रोग ठीक नही हो तो यह कारगर सिद्ध होती है।

रैटन्हिया 30 और एसिड नाइट्रिक 30 दिन में 3 बार – अत्यधिक जलन,पाखाना करने में जोर लगाना पड़ता है और होने पर मलद्वार में इतना तेज दर्द होता है कि कांच चुभ जाने जैसा दर्द होता है। मल नर्म होनेपर भी जलन होती है। मलद्वार में दरारें। मलद्वार फट जाना। जरा सा स्पर्श भी सहन नही होता। स्राव होते रहता है।

कॉलिन्सोनिया Q या 30 – यह भी बवासीर की एक बहुत अच्छी दवा है, लगता है जैसे छोटी छोटी लकड़ियाँ,रेत या पत्थर के टुकड़े ठूंस दिए गए हो , इसका लक्षण भी एस्कुलस हिप की तरह ही होता है लेकिन इसमें bleeding (रक्तस्राव) कम या ज्यादा होता ही रहता है एस्कुलस हिप के लक्षण में bleeding नहीं होता है साथ ही सख्त कब्ज। एस्कुलस हिप के लक्षण में कमर दर्द भी होता है पर इसमें कमर दर्द नही होता  

इग्नेशिया 30 दिन में 3 बार – हर बार मलत्याग के बाद बवासीर के मस्से निकल आते हैं और लटक पड़ते हैं जो बहुत देर तक बाहर रहते हैं (रैटन्हिया)। मलत्याग करते समय थोडा स दबाब देने से या झुकने से या किसी बस्तु को उठाने से गुदा बाहर निकल जाता है।

मिलिफोलियम Q 10 -10 बूंद दिन में 3 बार – चमकदार लाल रक्तस्राव (bleeding), बिना कोई दर्द के। यह दवा किसी तरह के bleeding जिसका रंग लाल चमकीला हो उसमे फायदा करती है।

हेमामैलिस Q 10-10 बूंद दिन में 3 बार  – बवासीर जिससे काफी रक्तस्राव (Bleeding) हो, खून का रंग कुछ काला और थक्केदार साथ ही जलन और दर्द, चुभन ,छिल जाने जैसी अनुभूति हो | मलत्याग की निरंतर इच्छा , नीले रंग के दाने

आर्सेनिक 30 दिन में 3 बार  – चलते – फिरते समय या अथवा बैठे रहने पर सुई चुभने जैसा दर्द और पीड़ा , लेकिन मलत्याग करते समय दर्द नहीं, बेचैनी, बैठना या सोना कठिन होता है, अत्यधिक जलन और दर्द जो गर्मी से बढ़ता हो

पिओनिया Q – मलद्वार में तीव्र खुजली, मलत्याग के बाद जलन, दुर्गंधित स्राव होता है, मलद्वार के पास बैगनी रंग का मस्से।

कालि म्यूर  6x या 12x– जब बवासीर का रक्तस्राव काला गाढ़ा थक्केदार हो।

 

 

Reference –

Practitioner guide (Dr.NC ghosh)

Materia media (Dr HC Allen)

Materia media (Dr.willium boerick)

 

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