homeopathic medicine for diarrhea

Contents

Diarrhoea
डायरिया या अतिसार

अतिसार को अंग्रेजी में डायरिया या बोलचाल की भाषा में दस्त बोलते हैँ। पाचन तंत्र के बीमारियों में यह एक काफी भयंकर रोगों में से एक है, यह प्रायः खाने पीने की गड़बड़ी के कारण होता है। खाना को जब आमाशय पचा नहीं पाता तब इस कारण बिना पचे या अधपचे खाने के साथ पानी के तरह पतले काफी मात्रा में दस्त होने लगते हैँ और इसे ही डायरिया बोला जाता है।

डायरिया के प्रकार
डायरिया मुख्य रूप से 4 तरह के होते हैँ।

  1. Irritative – बहुत ज्यादा खाने पीने, बासी, सड़ी चीजें खा लेने या गरिष्ट चीज खाने से होता है।

  2. Lienteric – इसमें रोगी जो खाता है उसका कुछ भाग ना पच कर या आधा पचकर मल के साथ निकलता है।

  3. conjestive – जब शरीर धुप में हो, आग के पास हो या काम करने से शरीर गरम हो और उस समय अचानक ठंडा चीज जैसे बर्फ, शर्बत या ठंडा पानी लेने से पसीना बंद होकर अतिसार हो जाता है।

  4. Sumner diarrhoea – गरमी के दिन में बहुत अधिक गरमी पड़ने से होती है

अतिसार के अन्य कारण
causes of diarrhoea in hindi

  • जब काफी सारा मल जमा हो जाता है तो यह अतिसार के द्वारा बाहर निकलता है।
  • जीवाणु संक्रमण
  • अजीर्ण, पाचन तंत्र में कोई खराबी
  • गंदे पानी या खराब खाना आदि का प्रयोग कर लेना
  • पाचन शक्ति से ज्यादा खा लेना
  • भय, शोक आदि के कारण मानसिक असंतुलन
  • आमाशय में कृमि होना
  • गरिष्ठ, चिकने, सूखे या ज्यादा ठंडे चीजों का खाने पीने में प्रयोग
  • लिवर के कोई बीमारी होना
  • कोई एन्टीबायोटिक दवा के साइड इफ़ेक्ट होना
  • कब्ज दूर करने के लिए कोई अंग्रेजी दवा का अधिक सेवन

प्रमुख लक्षण
symptoms of diarrhea in hindi

  • रोगी को पतले दस्त होते हैँ इसके लिए बार बार जाना पड़ता है
  • पेट में भारीपन होना
  • गुड़गुड़ाहट, दर्द और मरोड़ होना
  • घबराहट होना, उल्टी होना
  • दस्त लगने के पहले पुरे पेट में जोर का दर्द और बेचैनी होना
  • प्यास अधिक लगना और खाने पीने से अरुचि होना
  • पेशाब की मात्रा कम हो जाती है
  • रोगी काफी कमजोर हो जाता है और उसका ब्लड प्रेशर नीचे चला जाता है, पसीने के साथ हाथ पैर ठंडा हो जाना, बेहोशी भी आ सकती है।
  • सबसे पहले यह पता करना चाहिए की इसका कारण क्या है और उसको दूर करने का कोसिस होना चाहिए. खाने पीने में काफी सावधानी की जरूरत होती है, क्युकी खाने के बाद दस्त होने लगते हैँ।
  • बच्चों के अतिसार में पेट फूलना, कुथन, मरोड़, दर्द रोना ये सब मुख्य लक्षण है। मल का रंग हरा, काला रह सकता है कभी कभी खून मिले दस्त भी होते हैँ। कभी खट्टी गंध या कभी सड़ी बदबू या कभी बिना गंध के भी होते हैँ। बच्चों में दाँत निकलने के समय अक्सर पतले दस्त होते हैँ जो हरे, लसदार या पीले होते हैं, बुखार भी रहता है।

इस रोग की यह भी पहचान है की पेट को दबाने पर दर्द बढ़ता है और उल्टी होती है।
रोगी को बेड पर आराम करना चाहिए (bed rest).

  • पानी का कमी से बचने के लिए खूब पानी पीने का कोसिस होना चाहिए।
  • पुराने चावल का माड़ भात, मुंग की दाल, केला, मट्ठा, बेल, बकरी का दूध आदि का सेवन करना फायदेमंद रहता है
  • फल का जूस या साबूदाना दिया जा सकता है.
  • गरम पानी में (चीनी नमक का घोल) 2 चम्मच चीनी और 1 चम्मच नमक बार बार दें।

होम्योपैथिक दवायें

homeopathic medicine for diarrhea in hindi

नक्स वोम – रात में जागने के कारण रोग, तीखा मसालेदार खाने के कारण, उल्टी हो, कब्ज के बाद अतिसार। पेट में काटने, खोंचा मारने के तरह दर्द। बार बार दस्त लगे मगर थोड़ा थोड़ा हो। खाने के बाद बीमारी बढ़ना। क्रोधी और चिड़चिड़े मिजाज का रोगी के लिए खास।

इपिकाक और पल्साटिला – पल्साटिला का लक्षण है की पाखाना का रंग बदलता रहता है। घी, तेल, मीठा, खीर, पीठा आदि खाने के बाद रोग होना। प्यास नहीं रहना। ऐसा लगे जैसे खाया हुआ गले के ऊपर चढ़ रहा है। पेट गड़ गड़ करता है, दर्द होता है। इपिकाक में दस्त का रंग प्रायः हरा होता है, फेन मिला हुआ लार के तरह लसदार, कभी पीला, कभी काला भी होता है। दस्त के साथ साथ उल्टी होना, मिचली होना और खूब ऐठन और मरोड़। अगर पेट दर्द के साथ खायी हुई चीजें पेट में पड़ी रहे तो पल्साटिला और अगर खायी हुयी चीजें सीधे उल्टी होकर बाहर निकले तो इपिकाक। इपिकाक में मिचली ज्यादा रहती है। इपिकाक में जीभ साफ रहती है, पल्साटिला में जीभ पर मैल चढ़ा रहता है।

चायना – बदबूदार पतले दस्त होना। पेट फूल जाता है, तन जाता है जो डकार आने या वायू निकलने के बाद भी नहीं कम होता है। रोगी काफी कमजोर हो जाता है। दस्त होने के बाद भूख लगती है लेकिन जैसे जैसे खाता है दस्त होने लगता है।

एलो – पेशाब के समय या गैस निकलने के समय अनजाने में दस्त निकल आता है।

क्रोटन– पिचकारी के तरह दस्त, दस्त आने के पहले पेट में दर्द नहीं रहता है लेकिन खाने पीने के बाद दस्त और उल्टी बढ़ जाता है।

कोलोसिन्थ – पेट में अत्यधिक दर्द, इतना दर्द की रोगी उसको हाथ से दबा कर रखे, दर्द के कारण रोगी छटपटा जाता है। ऐंठन, मरोड़ का दर्द – इन लक्षणों के साथ अतिसार, गहरा पीला रंग का मल फेन मिला हुआ कभी कभी खून मिला रहना। पानी के तरह पतला दस्त जो कभी कभी बिना दर्द के भी हो सकता है। दस्त आने के पहले जोर की ऐंठन और मरोड़ का दर्द और इतना तेज वेग रहना की संभाल नहीं सकना। पाखाना होने के बाद या तो दर्द घट जाता है या बढ़ जाये।

वेरेट्रम – चावल के धोवन की तरह या सड़ा कोहड़ा के जैसा दस्त जो बहुत जल्दी जल्दी और बहुत बहुत होता है। ठंडा पानी पीने का अत्यधिक इच्छा, पानी बहुत पीता है लेकिन प्यास खतम नहीं होती। हाथ पैर में ऐंठन, दर्द से छट पटाया करता है। उल्टी, दस्त और पसीना सब खूब होते हैँ।

चपैरो एमारगोसो- अगर बीमारी पुरानी हो और कोई दवा खास फायदा ना करे

बच्चों में डायरिया का उपचार

homeopathic medicine for diarrhea in child

ईथूजा – यह बच्चे के रोगों की एक खास दवा है। बच्चे को दूध बिल्कुल नहीं पचता है, दाँत निकलने के समय या गरमी के दिन में बच्चे को हैजा या डायरिया हो जाना, साथ में अकड़न। बहुत कमजोरी, सिर ऊंचा नहीं कर सकता। दूध पीने के बाद थक्कों के रूप में उल्टी और उसके बाद सुस्त हो जाना। मृगी के जैसा लक्षण, चेहरा लाल और अकड़न। पाखाना का रंग हल्का पीला या हल्का हरा, कभी पानी के तरह पतला दस्त, साथ में पेट में कूथन और दर्द ज्यादा रहना। बच्चा सो नहीं पाए, छटपटाता रहता है, खट्टी उल्टी और हर बार दस्त उल्टी होने के बाद मुर्दे के तरह बेजान पड़ा रहे।

रियुम – बच्चों में खट्टी गंध वाला अतिसार। पुरे शरीर से खट्टी गंध आती है। दस्त का रंग भूरा, फेन भरा और उसमें खट्टी गंध होना इस दवा का प्रमुख लक्षण है। दस्त के पहले मरोड़ वाला दर्द साथ में कूथन। दस्त इतना खट्टा होता है की धो देने के बाद भी गंध खत्म नहीं होती। रात में बीमारी बढ़ जाना।

पोडोफाइलम – दाँत निकलने के समय पेट की गड़बड़ी और पतले दस्त होना। मल बहुत बदबूदार होना, मल का रंग पीला या हरा, पानी के तरह पतला। बिना दर्द के हर बार बहुत ज्यादा मात्रा में दस्त होना। लगातार जम्हाई और अंगड़ाई, कराहना, काँखना। दस्त होने के पहले पेट गुड़ गुड़ाता है। बच्चे का दाँत निकलते समय अलग अलग रंग का दस्त होना, दाँत कड़कड़ाता है, मसूढ़े दबाता है हर समय रोते रहता है। पेट के बीमारियों में यह बच्चे के अलावा बड़े और बूढ़े लोगो में भी समान रूप से फायदेमंद है।

कैमोमिला– बहुत ज्यादा क्रोधी, चिड़चिड़ा बच्चे, हर समय गुस्सा में रहना रोते रहना, चीजें फेक देना ये सब लक्ष्णों वाले बच्चे का अतिसार। दाँत निकलने के समय बच्चे को बेचैनी और नींद ना आना। दस्त बहुत बदबूदार, पीला हरा मिला हुआ रंग का, गरम मलद्वार की खाल गल जाती है।

कैल्केरिया फॉस – बहुत दुबले पतले बच्चे का अतिसार होना, खून की कमी और जिसका शरीर उम्र के अनुसार काफी कमजोर हो और दाँत काफी देर से निकलना। दूध सहन नहीं होता है। बच्चा दूध पीते है उल्टी कर देता है, जिस चीज को पीता है ठीक वही दस्त में निकल जाये, लगातार दस्त हो, हरे रंग का दस्त के साथ एक सफेद और चिकना पदार्थ होना।

नैट्रम फॉस – बच्चों का खट्टी गंध वाला पतले दस्त, हरे रंग का, दूध की उल्टी और पेट दर्द के साथ बुखार। सोते समय दाँत कड़ कड़ करना। अम्ल पीत, खट्टे डकार, मुँह का स्वाद खट्टा।

 

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published.